Ashok

सम्राट अशोक / Samrat Ashok

सम्राट अशोक के सर्वश्रेष्ठ वचन / Samrat Ashok Quotes

अन्य सम्प्रदायों की निंदा करना निषेध है;
सच्चा आस्तिक उन सम्प्रदायों में जो कुछ भी सम्मान देने योग्य है उसे सम्मान देता है।

सभी इन्सान मेरे बच्चे हैं। जो मैं अपने बच्चों के लिए चाहता हूँ, मैं इस दुनिया में और इसके बाद भी उनका भला और ख़ुशी चाहता हूँ, वहीँ मैं हर इंसान के लिए चाहता हूँ। आप नहीं समझते हैं कि किस हद तक मैं ऐसा चाहता हूँ, और अगर कुछ लोग समझते हैं, तो वे ये नहीं समझते कि मेरी इस इच्छा की पूरी हद क्या है।

मैंने कुछ जानवरों और कई अन्य प्राणियों को मारने के खिलाफ कानून लागू किया है, लेकिन लोगों के बीच धर्म की सबसे बड़ी प्रगति जीवित प्राणियों को चोट न पहुंचाने और उन्हें मारने से बचने का उपदेश देने से आती है।

It is forbidden to decry other sects; the true believer gives honour to whatever in them is worthy of honour.

All men are my children. What I desire for my own children, and I desire their welfare and happiness both in this world and the next, that I desire for all men. You do not understand to what extent I desire this, and if some of you do understand, you do not understand the full extent of my desire.

I have enforced the law against killing certain animals and many others, but the greatest progress of righteousness among men comes from the exhortation in favor of non-injury to life and abstention from killing living beings. हर धर्म में प्रेम, करुणा, और भलाई का पोषक कोर है। बाहरी खोल में अंतर है,
लेकिन भीतरी सार को महत्त्व दीजिये और कोई विवाद नहीं होगा। किसी चीज को दोष मत दीजिये,
हर धर्म के सार को महत्त्व दीजिये और तब वास्तविक शांति और सद्भाव आएगा।

किसी को सिर्फ अपने धर्म का सम्मान और दूसरों के धर्म की निंदा नहीं करनी चाहिए।

विभिन्न कारणों से अन्य धर्मों का सम्मान करना चाहिए।
ऐसा करने से आप अपने धर्म को विकसित करने में मदद करते हैं और दुसरे धर्मों को भी सेवा प्रदान करते हैं।

Every religion has the wholesome core of love, compassion and good will. The outer shell differs, but give importance to the inner essence and there will be no quarrel. Don’t condemn anything, give importance to the essence of every religion and there will be real peace and harmony.

One should not honor only one’s own religion and condemn other religions.

One should honor other religions for various reasons. By so doing one helps one’s own religion to grow and also renders service to the religions of others. चलिए हम सब सुनते हैं, और दूसरों के द्वारा बताये गए सिद्धांतों को सुनने के लिए तैयार रहते हैं।

सबसे महान जीत प्रेम की होती है, ये हमेशा के लिए दिल जीत लेती है।

वह जो अपने सम्प्रदाय की महिमा बढाने के इरादे से उसका आदर करता है और दूसरों के संप्रदाय को नीचा दिखाता है, ऐसे कृत्यों से वह अपने ही सम्प्रदाय को गंभीर चोट पहुंचता है।

Let all listen and be willing to listen to the doctrines professed by others.

The most noble victory is that of love, it wins the hearts forever.

He who does reverence to his own sect, while disparaging the sects of others with intent to enhance the glory of his own sect, by such conduct inflicts the severest injury on his own sect. माता-पिता का सम्मान किया जाना चाहिए और बड़ों का भी,
जीवित प्राणियों के प्रति दयालुता को मजबूत किया जाना चाहिए और सत्य बोला जाना चाहिए।

एक राजा से ही उसकी प्रजा की पहचान होती हैं.

Father and mother should be respected and so should elders,
kindness to living beings should be made strong and the truth should be spoken. कोई भी व्यक्ति जो चाहे प्राप्त कर सकता हैं, बस उसे उसकी उचित कीमत चुकानी होगी.

सफल राजा वही होता हैं, जिसे पता होता हैं कि जनता को किस चीज की जरूरत हैं.

सबसे महान जीत प्रेम की होती है. यह हमेशा के लिए दिल जीत लेती है. जानवरों व अन्य प्राणियों को मारने वालो के लिए किसी भी धर्म में कोई जगह नहीं हैं.

दूसरो के द्वारा बताये गये सिद्धांतो को सुनने के लिए हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए.

तीन कार्य जो हमें सदा स्वर्ग की ओर ले जाते हैं, ” माता-पिता का सम्मान, सभी जीवो पर दया, और सत्य वचन जितना कठिन संघर्ष करोगे, आपके जीत कि ख़ुशी भी उतनी ही बढ़ जयेगी.

अपने धर्म की प्रगति इसी में हैं कि हम अन्य धर्म का भी सम्मान करे.

अपने धर्म का सम्मान और दुसरो के धर्म की निंदा करना किसी धर्म में नहीं बताया गया हैं. हर धर्म हमें प्रेम, करुणा और भलाई का पाठ पढाता हैं.
अगर हम इसी दिशा में आगे बढे तो कभी किसी के बीच कोई विवाद ही नहीं होगा.

आप सभी मेरे बच्चे के समान हैं. मैं इस दुनिया में और मरने के बाद भी हद से ज्यादा आपका भला और ख़ुशी चाहता हूँ.

हमें अपने माता – पिता का आदर करना चाहिए और अपने से बड़ों का भी.
जो जीवित प्राणी है उनके प्रति दया दिखानी चाहिए और हमेशा सच बोलना चाहिए.