बदलता भारत

लेखक:- नजमुन नवी खाँ "नाज़"

बदलाव की बयार से हमारा देश भारत भी अछूता नही रहा है पिछले एक दशक मे हमारे देश मे तमाम बदलाव आये है उनमे से कुछ बदलाव निम्नवत है युवाओ की घर से दूरी - देश का निर्माण युवाओ से होता है आज से एक दशक पहले युवा जो शिक्षा या अन्य प्रायोजनो से घ़र से दूर रहते थे वो त्योहारो पर कितनी भी परेशानी होते हुए भी घर पहुच कर परिवार के साथ त्योहार मनाने का प्रयास करते थे आज का युवा घर मे रहते हुए भी त्योहारो पर अपने दोस्तो के साथ पार्टी जिसमे नशा एव जुआ एक प्रमुख तत्व रहता है मे ज्यादा दिलचस्पी लेता है आपसी मदद की कमी - हमारा देश सामाजिक समरसता की मिशाल था आज यह भावना भी हमारे देश मे लुप्त होती जा रही है पहले व्यकित राह चलते लोगो की भी मदद कर देता था परन्तु आज पडोसी की भी मदद से कतराता है बडे शहरो मे हम यह तक नही जानते कि हमारा पडोसी कौन है ? अपनी बोली (हिंदी/क्षेत्रीय) भाषा को हेय नजर से देखना - बदलाव के जमाने मे हमने अपनी भाषा को नकारात्मक नजरिये से देखना सुरू कर दिया है आज हम अगर समूह मे होते है तो अग्रेजी भाषा को बोलने मे गर्व महसूस करते है जबक़ि अपनी मात्रभाषा से परहेज करते है धेर्य की कमी - बीते दशको मे साल दर साल हमारे धेर्य मे कमी आ रही है आज कल छोटी छोटी बातो मे भी लोग धेर्य खोकर दूसरो को शारिरीक छति पहूचा देते है जल्दी सफल होने की महात्वाकाक्षा हमे गलत मार्ग पर चलने की और धकेल रही है सामाज़िकता का अभाव - बीते दशको मे हमारे देश मे सामाज़िकता का जबरदस्त अभाव होता जा रहा है आज धर्म,जाति के नाम पर कालोनिया विकसित की जा रही है पहले सभी लोग (धर्म,जाति) एक साथ रहते थे और एक दूसरे के सुख-दुख / त्योहारो को मनाते थे आज जो द्वेष/ विशाद की भावना, साम्प्रदायिकता बढ रही है उसका एक बड़ा कारण यह है हम दूसरे धर्म के बारे मे जानते ही नही है बस जो कोई बता देता है उसे मान कर मन मे भावना बना लेते है
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