Mukesh

मुकेश कुमार / Mukesh Kumar

मुकेश कुमार / Mukesh Kumar

सावन

रिमझिम - रिमझिम करता सावन आया |
तड़-तड़ करती चमकीली बिजली लाया ||

मोर नाचते, कोयल गाती मीठे-मीठे गान |
बागों में झूले पड़े साथ मल्हारों की तान ||

बिन साजन सजनी तड़पे काली-काली रात |
और ऊपर से बेरिन बनी वो मंद-मंद बरसात ||

टर्र-टर्र मेंढक करें, साँय-साँय करती ठंडी समीर |
रात-रात भर करवट बदले गोरी, नींद कोसों दूर ||

दूर-दूर तक फैली हरियाली, झुक गई अमुआ डाली |
टिप - टिप झरते सावन की ऋतु होती बडी निराली ||

ताल-तलैया भर योवन में लेते मस्त - मस्त हिलोर |
उफान मारते नदियाँ-झरने, चहुंओर दिखे बस नीर ||

- मुकेश कुमार ऋषि वर्मा