Najmun Navi Khan

नजमुन नवी खाँ "नाज़" / Najmun Navi Khan "Naj"

मैं इंसान हूँ

मौलवी के लिये हिन्दू
पंडित पूछे तो मुसलमान हूँ
भूख जिसका मजहब
रोटी वेद पुराण है
मे इन्सान हूँ
पग पग में संघर्ष करते हुये
आधी अधूरी जिंदगी की मिसाल हूँ
मैं इंसान हूँ
भीड में खुद का वजूद तलाशने को बेताब हूँ
मैं इंसान हूँ
दूसरे के दुख को अपनाने को रहता तैयार हूँ
टूट गया पर पैसो के लिए जो ना बिका
वो ईमानदारी की मिसाल हूँ
हा में इंसान हूँ

में भी चाहता हूँ सोना

में भी चाहता हूँ सोना
सोना एक ऐसी गहरी नींद में
जिससे ना सुनाई दे भूखो का क्रंदन
लाचारों की चीखे , अबलाओ की करूण पुकार
चाहता हूँ बंद आँखे जो ना देखे रक्तरंजित शरीरो को
पल पल की घिसटती जिन्दगियो को देखते देखते थक सा गया हूँ
में चाहता हूँ एक ऐसी नींद जो ले जाए मुझको ऐसे पीड़ामयी संसार से कोसो दूर
मुझे चाहिए धार्मिक विकारो से मुक्ति जिनकी आड़ में बेगुनाहो के रक्त से नहा जाती है धरती
मुझे चाहिए ऐसे सत्ता लोभियो से मुक्ति जो कुर्सी तक लाशो की सीढी लगा कर पहुंचते है
में भी चाहता हूँ सोना
मुझको दिख जाता है हसते चेहरों के पीछे का दर्द
गुनगुनाते आवाजों की बीच में आती थरथराहट भी सुन लेता हूँ
हां देखा है संघर्ष करते लोगो की टूटन
में भी चाहता हूँ सोना
सोना एक ऐसी गहरी नींद में